शनिवार, 29 जनवरी 2022

सुदर्शन चक्र की स्तुति, अम्बरीष द्वारा.

सुदर्शन स्तुति :-

अंबरीश ने कहा --प्रभु सुदर्शन! आप अग्निस्वरूप है। समस्त नक्षत्रमंडल के अधिपति चंद्रमाभीआपके स्वरूप है। जल,पृथ्वी,आकाश,वायु, पंचतन्मात्रा और संपूर्ण इंद्रियों के रूप में भी आप हैं।3।

भगवान के प्यारे, हजार दांत वाले चक्र देव! मैं आपको नमस्कार करता हूं। हे समस्त अस्त्र-शस्त्रोंको नष्ट करदेनेवाले एवं पृथ्वीके रक्षक! इन ब्राह्मण की रक्षा कीजिए।। 4।


आप ही धर्म है, मधुर एवं सत्य वाणी है; आप ही समस्त यज्ञों के अधिपति और स्वयं यज्ञ भी हैं। आप समस्त लोकोके रक्षक एवं सर्वलोकस्वरूप भी हैं। आप परमपुरुष परमात्माके श्रेष्ठ तेज है। 5।


हे सुनाभ! आप समस्त धर्मों की मर्यादा के रक्षक हैं। अधर्मका आचरण करनेवाले असुरोंको भस्म करनेके लिए आप साक्षातअग्नि हैं। आपही तीनों लोकोंके रक्षक एवं विशुद्ध तेजोमय है। आपकी गति मनके वेग के समान है और आपके कर्म अद्भुत है। मैं आपको नमस्कार करता हूं ,आप की स्तुति करता हूं।6।


हे वेद वाणी के अधिश्वर! आपके धर्ममय तेजसे अंधकारका नाश होता है और सूर्यआदि महापुरुषोंके प्रकाशकी रक्षा होती है। आपकी महिमाका पारपाना अत्यंत कठिन है।ऊंचे-नीचे और छोटे-बड़ेके भेदभावसे युक्त यह समस्त कार्यकारणात्मक संसार आपका ही स्वरूप है।7।


हे सुदर्शन चक्र! आपपर कोई विजय नहीं प्राप्त कर सकता।जिससमय निरंजनभगवान आपको चलातेहैं और आप दैत्यों एवं दानवोंकी सेनामें प्रवेश करतेहैं, उस समय युद्ध-भूमिमें उनकी भुजा, उदर,जंघा,चरण और गर्दनआदि निरंतर काटतेहुए आप अत्यंत शोभायमान होते हैं।8।


हे विश्वके रक्षक! आप रणभूमिमें सबका प्रहार सह लेते हैं,आपका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। गदाधारी भगवानने दुष्टोंके नाशके लिए ही आप को नियुक्तकिया है।आप कृपा करके हमारे कुल के भाग्योदयके लिए दुर्वासाजीका कल्याण कीजिए।हमारेऊपर यह आपका महानअनुग्रह होगा।9।


यदि मैंने कुछभी दान किया हो,यज्ञ कियाहो अथवा अपने धर्मका पालन किया हो, यदि हमारे वंश के लोग ब्राह्मणोंको ही अपना आराध्यदेव समझते रहे हो, तो दुर्वासाजी की जलनमिट जाए।10।


भगवान समस्तगुणोंके एकमात्र आश्रय है।यदि मैंने समस्तप्राणियों केआत्माके रूपमें उन्हें देखा हो और वे मुझपर प्रसन्नहो तो दुर्वासाजीके हृदय की सारी जलन मिट जाए।11।

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सुदर्शन चक्र की स्तुति, अम्बरीष द्वारा.

सुदर्शन स्तुति  :- अंबरीश ने कहा --प्रभु सुदर्शन! आप अग्निस्वरूप है। समस्त नक्षत्रमंडल के अधिपति चंद्रमाभीआपके स्वरूप है। जल,पृथ्वी,आकाश,वाय...